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Monday, September 21, 2026

यूपी पंचायत चुनाव 2026 की तारीखों पर बड़ा फैसला संभव!

 

23 सितंबर की हाईकोर्ट सुनवाई से बढ़ी हलचल, चुनाव कार्यक्रम और प्रशासकों के मुद्दे पर सबकी नजर

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2026 को लेकर गांव से लेकर लखनऊ तक हलचल तेज हो गई है। ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद प्रशासकों की व्यवस्था और पंचायत चुनाव कराने की समयसीमा को लेकर मामला न्यायालय तक पहुंच चुका है। अब 23 सितंबर को होने वाली प्रस्तावित सुनवाई को लेकर संभावित प्रत्याशियों और पंचायत प्रतिनिधियों की निगाहें हाईकोर्ट पर टिकी हैं।


हालांकि, 23 सितंबर की सुनवाई के बाद चुनाव की तारीख घोषित होना अभी निश्चित नहीं है। चुनाव की अंतिम तारीखों की घोषणा राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से अधिसूचना जारी होने के बाद ही मानी जाएगी। आयोग की वेबसाइट पर फिलहाल पंचायत चुनाव -2025-26 के तहत 2026 की पंचायत मतदाता सूची और चुनाव संबंधी तैयारियों से जुड़े संसाधन उपलब्ध हैं।

ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद बढ़ा विवाद

उत्तर प्रदेश की करीब 57 हजार 694 ग्राम पंचायतों के प्रधानों का कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो चुका है। इसके बाद राज्य सरकार ने पंचायत चुनाव होने तक मौजूदा ग्राम प्रधानों को प्रशासक के रूप में जिम्मेदारी देने की व्यवस्था की थी। इसी व्यवस्था को लेकर हाईकोर्ट में याचिकाएं दाखिल हुईं।

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत में चुनाव कराने की समयसीमा और पंचायतों में प्रशासकों की नियुक्ति जैसे मुद्दे उठे। इससे चुनाव कार्यक्रम को लेकर इंतजार कर रहे संभावित प्रत्याशियों की बेचैनी भी बढ़ी है।

चुनाव की तारीखों को लेकर अभी इंतजार

पंचायत चुनाव के लिए मतदाता सूची तैयार करने का काम महत्वपूर्ण चरण में है। राज्य निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर 2026 की पंचायत मतदाता सूची डाउनलोड करने और मतदाता विवरण खोजने की सुविधा उपलब्ध है। साथ ही आयोग की ओर से पंचायतों, क्षेत्र पंचायतों, ग्राम पंचायतों और वार्डों का विवरण भी उपलब्ध कराया गया है।

ऐसे में माना जा रहा है कि चुनावी प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न चरण पूरे होने के बाद आयोग चुनाव कार्यक्रम जारी करेगा। हालांकि, मतदान की तारीख, नामांकन की तिथि और चुनाव कितने चरणों में होगा, इस पर अंतिम निर्णय आयोग की अधिसूचना से ही स्पष्ट होगा।

आरक्षण पर भी टिकी नजर

पंचायत चुनाव में आरक्षण का मुद्दा भी बेहद अहम है। ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य और जिला पंचायत सदस्य के पदों पर आरक्षण की स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही बड़ी संख्या में संभावित प्रत्याशी अपनी चुनावी रणनीति तय कर सकेंगे।

ग्रामीण क्षेत्रों में संभावित प्रत्याशी लगातार अपने-अपने क्षेत्रों में जनसंपर्क कर रहे हैं। कई दावेदार आरक्षण सूची और चुनाव कार्यक्रम का इंतजार कर रहे हैं। वहीं, वर्तमान पंचायत प्रतिनिधियों की भी नजर न्यायालय और शासन से आने वाले अगले आदेशों पर है।

हाईकोर्ट में पहले भी उठ चुका है चुनाव की समयसीमा का मुद्दा

पंचायत चुनाव में देरी को लेकर हाईकोर्ट ने पहले भी राज्य निर्वाचन आयोग से चुनाव कराने की समयसीमा और तैयारियों के बारे में जानकारी मांगी थी। जून में सुनवाई के दौरान अदालत ने चुनाव कार्यक्रम की स्थिति को लेकर आयोग से सवाल किया था।

इसके बाद प्रशासकों की नियुक्ति से जुड़े मामलों में भी सुनवाई हुई। जुलाई में इलाहाबाद हाईकोर्ट की एकल पीठ ने प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के खिलाफ दाखिल एक याचिका की सुनवाई छह सप्ताह के लिए टाल दी थी, क्योंकि इसी विषय से जुड़ा मामला लखनऊ खंडपीठ में पहले से विचाराधीन था।

गांवों में चुनावी माहौल गर्म

चुनाव की तारीख अभी घोषित नहीं हुई है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में चुनावी गतिविधियां तेज हो गई हैं। संभावित प्रत्याशी मतदाताओं से संपर्क साधने में जुटे हैं। कई गांवों में दावेदार अपने समर्थकों के साथ बैठकों का दौर चला रहे हैं।

सबसे ज्यादा उत्सुकता उन दावेदारों में है, जो लंबे समय से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। आरक्षण की स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही यह तय हो सकेगा कि कौन-सा पद किस वर्ग के लिए आरक्षित रहेगा। इसके बाद चुनावी तस्वीर और साफ होने की उम्मीद है।

कब-कब क्या क्या हुआ ?

26 मई 2026: प्रदेश की ग्राम पंचायतों के प्रधानों का कार्यकाल समाप्त हुआ।

मई 2026: चुनाव होने तक मौजूदा प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने की व्यवस्था की गई।

जून 2026: हाईकोर्ट में पंचायत चुनाव की समयसीमा और चुनाव कराने की तैयारियों को लेकर सुनवाई हुई।

जुलाई 2026: प्रशासक नियुक्ति से संबंधित याचिकाओं पर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई।

सितंबर 2026: पंचायत चुनाव 2026 को लेकर न्यायिक और प्रशासनिक गतिविधियों पर निगाहें बनी हुई हैं।

23 सितंबर: प्रस्तावित सुनवाई को लेकर चुनाव की समयसीमा और संबंधित मुद्दों पर अगली स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।


क्या 23 सितंबर को चुनाव की तारीख घोषित होगी?

यह सबसे बड़ा सवाल है। फिलहाल इसे लेकर निश्चित रूप से कुछ कहना जल्दबाजी होगी। अदालत की सुनवाई में क्या आदेश आता है और उसके बाद राज्य सरकार तथा राज्य निर्वाचन आयोग क्या कदम उठाते हैं, इससे आगे की प्रक्रिया तय होगी।

महत्वपूर्ण बात यह है कि हाईकोर्ट की सुनवाई और राज्य निर्वाचन आयोग की चुनाव अधिसूचना दो अलग प्रक्रियाएं हैं। इसलिए जब तक आयोग आधिकारिक चुनाव कार्यक्रम जारी नहीं करता, तब तक सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से सामने आ रही किसी तारीख को आधिकारिक चुनाव तिथि नहीं माना जाना चाहिए।

चुनाव आयोग की तैयारी जारी

राज्य निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर Panchayat Election-2025-26 के तहत पंचायत मतदाता सूची 2026 उपलब्ध है। आयोग की साइट पर मतदाता खोज, बीएलओ/सुपरवाइजर संबंधी विवरण और पंचायतों एवं वार्डों की जानकारी भी उपलब्ध कराई गई है।

ऐसे में अब 23 सितंबर की सुनवाई के बाद आने वाली स्थिति पर सभी की नजर है। अदालत की कार्यवाही के साथ-साथ चुनाव आयोग की तैयारियां किस गति से आगे बढ़ती हैं, इसी से आने वाले दिनों में पंचायत चुनाव की तस्वीर और स्पष्ट होगी।

फिलहाल गांव की सरकार के चुनाव को लेकर इंतजार जारी है और संभावित दावेदारों की निगाहें हाईकोर्ट से लेकर चुनाव आयोग तक टिकी हुई हैं।

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