लखनऊ । मुख्य चुनाव आयुक्त पर लगे आरोपों से राजनीतिक गर्मी तेज हो गई हे। समूचा विश्व एकजुट होकर जहां मुख्य चुनाव आयुक्त की गिरफतारी व पूर्व में हुए विभिन्न राज्यों के चुनाव को रद करने की मांग कर रहा है, तो वहीं पूरे मामले को सुप्रीम कोर्ट ले जाए जाने की प्रक्रिया प्रारंभ हो गई हे। हालांकि इन सबके बीच चुनाव आयोग पूरी तरह से चुप है। ऐसे में कई प्रकार के सवाल खडे हो रहे हैं।
बीतेे कुछ वर्षो से चुनाव आयोग पर निश्पक्ष होकर चुनाव न कराए जाने के आरोप लगते चले आ रहे हैं। कभी ईवीएम से छेडछाड, तो कभी वोटरों का नाम काटे जाने के आरोप लगते हैं। इसे लेकर विपक्ष आवाज भी बुलंद करता है, लेकिन इसका कोई विषेश असर नहीं पडा। इस बीच गत दिवस एक बडे अखबार ने कई खुलासे किए। इन खुलासों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर ही तरह तरह के आरोप लगाए गए। इन कथित आरोपों के सामने के बाद देश में राजीति हलचल बढ गई । समूचा विपक्ष एकजुट होकर मुख्य चुनाव आयुक्त पर हमलावर हो गया। कांग्रेस, सपा, आम आदमी पार्टी, टीएमसी समेत अन्य राजनैतिक दलों के बडे नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर देशद्रोह का केस दर्ज करने, उन्हें गिरफतार करने व पूर्व में हुए बिहार, महाराष्ट्र, बिहार, हरियााणा, पश्चिम बंगाल में हुए चुनाव को रद्द कर फिर से चुनाव की मांग करने लगा। इन सबके बीच सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ट अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पूरे मामले को सुप्रीम कोर्ट में ले जाने की बात की।
इन सबके बावजूद चुनाव आयोग की तरफ से किसी भी प्रकार की प्रेस कांफ्रेंस कर कोई सफाई नहीं दी गई। सिर्फ एक पत्र जारी किया गया। इसमें भी आरोपों को लेकर कोई बात नहीं कही गई। हालांकि बीजेपी पूरी तरह से मुख्य चुनाव आयोग के साथ खडी जरूर नजर आ रही हे। अब यहां सवाल उठता है कि क्या वाकई मुख्य चुनाव आयोग पर लगे आरोपों में सच्चाई हे। क्या एसआईआर में बडे पैमाने पर घोटाले हुए। क्या वाकई वोट चोरी हुई। इन सभी सवालों का जवाब अभी आना षेश हे। इस प्रकार का खुलासा ऐसे समय सामने आया है, जब 2027 की शुरूआत में उत्तर प्रदेश में चुनाव हे। बहरहाल आगामी कुछ समय अत्यंत गहमागहमी वाला होगा। देखना यह होगा कि चुनाव आयोग अपने मुखिया पर लगे आरोपों का बचाव किस प्रकार करता हे। यह भी देखना होगा कि क्या सुप्रीम कोर्ट इस मामले में किसी भी प्रकार की दखलअंदाजी करेगा।


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