Breaking

Saturday, September 26, 2026

एकता व भाईचारा का प्रतीक है विश्व प्रसिद्ध दरगाह किछौछा, सालाना उर्स में पहुंचते हैं देश विदेश से ज़ायरीन

अम्बेडकरनगर। महान सूफी संत हजरत मखदमू अशरफ जहांगीर सिमनानी की विश्व प्रसिद्ध दरगाह पर वैसे तो पूरे जायरीन पहुंचते हैं, लेकिन सालाना उर्स व अगहनिया मेले में इनकी संख्या लाखों में पहुंच जाती है। हालांकि किछौछा दरगाह को प्रकट्यस्थल का दर्जा तो नहीं मिला है, लेकिन आने वाले जायरीन के लिए सभी प्रकार की बेहतर व्यवस्थाएं इंतेजामिया कमेटी द्वारा की जाती है।

अशरफपुर कीछौछा दरगाह का बुर्ज 

जिला मुख्यालय से लगभग 25 किमी दूर स्थित विश्व प्रसिद्ध दरगाह पर न सिर्फ देष बल्कि विदेष से भी बडी संख्या में जायरीन जियारत के लिए पहुंचते हैं। शायद ही कोई ऐसा दिन गुजरता हो, जब बडी संख्या में जायरीन आस्ताने आलिया पर माथा टेकने के लिए न पहुंचते हों। सात दिनों तक चलने वाले सालाना उर्स व दीपावली पर्व से 40 दिन तक चलने वाले अगहनिया मेले में जायरीन की संख्या लाखों तक पहुंच जाती है। सालाना उर्स के अंतिम दिनों में सज्जादानशीन सैयद मोहिउददीन द्वारा जब पवित्र वस्त्र खिरका पहना जाता है, तो इस विषेश वस्त्र की जियारत करने लाखों की भीड दरगाह परिसर पहुंच जाती है।


बसखारी चैराहे से महज दो किमी दूर स्थित इस अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिकस्थल को अब तक प्र्यटकस्थल नहीं घोषित किया जा सका है । ऐसे में दरगाह की समूची व्यवस्था इंतेजामिया कमेटी द्वारा की जाती हे। कमेटी अध्यक्ष अजीज अशरफ ने बताया कि दरगाह परिसर में आने वाले जायरीन को किसी भी प्रकार की समस्या न हो, इसके लिए कमेटी द्वारा सभी जरूरी कदम उठाए जाते हैं। साफ सफाई पर विषेश ध्यान दिया जाता है। इसके अलावा प्रकाश, पेयजल, आवागमन की भी बेहतर व्यवस्था की गई है। बताया कि उर्स व मेला को बेहतर तरीके से निपटाने में प्रशासन का बडा सहयोग रहता है।


सैयद अजीज ने बताया कि परिसर में ही नीर शरीफ स्थित है। मान्यता है कि इसमें डुबकी लगाने से ऊपरीसाया, कोढ समेत कई अन्य प्रकार के रोग दूर हो जाते हैं। कमेटी से जुडे चांद अशरफ ने बताया कि विश्व प्रसिद्ध किछौछा दरगाह राष्ट्रीय एकता व एखंडता का प्रतीक है। यहां सभी मजहब के लोग पहुंचते हैं और आस्ताने आलिया पर पहुंचकर माथा टेकते हैं। साथ ही चादर भी चढाते हैं। अगहनिया मेला व उर्स के दौरान देश के अलग अलग क्षेत्र से बडी संख्या में व्यवसाई तरह तरह की दुकानें लगाते हैं, तो आकर्षक झूले भी रहते हैं।

No comments: